Monday, 1 December 2014

मंहगाई और भ्रष्टाचार पर बड़ी बुद्धिमानी से पेश आती भाजपा सरकार..


  
अक्सर जो दिख रहा है वो होता नहीं है और जो होता है वो दिखाई नहीं देता । भारतीय राजनीति कुछ ऐसे ही मोड़ पर आ खड़ी है कांग्रेस बनाम भाजपा ये दो ही पार्टियां भारतीय राजनीति की दिशा और दशा तय करती है । कोई बहुत लंबा इतिहास नहीं है स्वतंत्र भारत का पर इतने कम समय में भी यहां की राजनीति ने बहुत पलटियां खाई हैं । वर्तमान समय भारतीय राजनीति को अजीब से चौराहे तक ले आया है जहां रास्ते तो हैं पर राहगीर पसोपेश में हैं कौन सी राह उसे मंजिल तक पहुचायेगी और मंजिल कौन सी हो इस पर भी राहगीर भ्रमित है।
जिस तरह से वर्तमान में यहां घोटालों और भ्रष्टाचारों का अनावरण हुआ है इससे यहां सरकार बनाने वाले मतदाताओं में हताशा तो पैदा हुई ही साथ ही जिज्ञासा ने भी घर किया है कि आगे आने बाले सालों में उनका भविष्या क्या होगा ? वित्तीय संकटो से जूझती दुनियां से भारत भी परे नहीं है 2008 के बाद से भारतीय अर्थ व्यवस्था भी लगातार हिचकोले खाते हुये ही चलती आ रही है । पर उन हिचकोलेां का असर 2 जी स्पेक्ट्रम से दिखाई पड़ना प्रारंभ हुआ इसके बाद भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन ने अपना सिर उठाया और अब कोल आवंटन से शुरू यह रस्साकसी वर्तमान में काले धन तक आकर ठहर सी गई है । सरकार बदली पर स्थितियां वही की वही है।
केंद्र में बैठी नई भाजपा सरकार आज लोगों में जिज्ञासा और उम्मीद का विषय बन चुकी है । जब भी किसी सरकार पर आरोप लगते हैं उस राजनीतिक पार्टी का संगठन उनकी वकालत के लिये वकील की तरह पेश आता है । कांग्रेस में वकील तो थे पर उनके तरफ से सही तर्क पेश करने वाली वकालत होती कभी भीं दिखाई नही पड़ी, बचाव में कांग्रेस लगभग पूरे टर्म अवाक रही । बचाव में कांग्रेस ने जो भी कुछ कहा उस पर जनता ने अपने कान बंद कर लिये ।
जहां कांग्रेस मांस बेस राजनीतिक पार्टी है इससे ठीक विपरीत उसकी सबसे बड़ी प्रतिद्वन्दी और वर्तमान में शासित माजपा एक केडर बेस राजनैतिक पार्टी है । मिले हुये अवसरों को खोना उनके लिये आत्मघात से कम नहीं है । पूरी तरह से संगठन की कार्यप्रणाली पर निर्भर माजपा जिस समझदारी से जरूरतो पर स्प्लिट और फेस ओन-आफ करती है यही उनके संगठन शक्ति की सही तस्वीर है । 2 जी घोटाले में लगभग एक हजार तिरेसठ करोड़ रूपये और कोल आवंटन में एक हजार तिरासी करोड़ के घाटे की बात सीएजी द्वारा कही गई है । अब घाटे को घोटाले में बदलने में भाजपा किस हद तक कामयाब हुई इसे तो लोकसभा में लिये जनता के निर्णय ने ही बता दिया, भविष्य में होने वाले घाटें के कई हजार करोड़ों रूपये आम लोगों को कांग्रेसी जेबों में दिखलाई देने लगे । कितनी आसानी से उन्होने आगे 20 साल में होने वाले घाटे पर लोगों को ये समझा दिया कि इतने हजार करोड़ रूपये सीधे कांग्रेस की जेब में गये । दूसरी तरफ इन घोटालों की सांख्यकी और उसके मकड़जाल को कांग्रेस, आम जनों को कितना संमझा पाई ? कांग्रेस ने ये सफाई तो दी की सोर्सो को सस्ते में देने के पीछे इनसे बने उत्पादों को जनता तक सस्ते में पहुचाना ही इस सस्ती नीलामी का मुख्य मकसद था पर लोकसभा और उसके बाद के चुनावों में कांग्रेस की वर्तमान दशा, दोनों संगठनों की योग्यता और कर्मठता को आकने का इससे अच्छा उदाहरण कोई दूसरा हो ही नहीं सकता ।
2 जी और कोल आवंटन मामले में कांग्रेस सरकार पर यही आरोप लगा कि उसने मूल्य से कम याने सस्ते में इन उपयोगिताओं की नीलामी की और इससे आर्थिक फायदा उठाया । आर्थिक फायदा उठाना भ्रष्टाचार पर एक अलग मुद्दा हो सकता है और इस पर जबाब देना सरकारी जिम्मेदारी बनती है पर हम यहां मुद्दो पर नही सिर्फ तथ्यों पर बात करेंगे: चाहे ट्रांस कम्यूनीकेशन हो या कोल उत्पादन, ये व्यापारिक प्ले ग्राउंड हैं पर आम लोग भी इसमें किसी न किसी तरह शामिल हो ही जाते हैं। भाजपा ने उस समय की कांग्रेस सरकार पर यह आरोप तो लगाया कि उसनें भविष्य तक के लिये 2 जी और कोल जैसे संशाधनों को व्यापारियों को सस्ते में बेचा पर यहां भाजपा की इन संसाधनों को भविष्य तक के लिये मंहगे में बेचने की मंशा साफ झलकती है । भले ही 2 जी प्रोडक्ट के उपभोक्ता संपन्न और इतनी बड़ी संख्या में न हो पर जितने भी है, हैं तो और मंहगे में मूल उत्पाद एवं संसाधनों की नीलामी याने उपभोक्ताओं के लिये प्राइज हाइक ! निश्चित ही मंहगी नीलामी से आम भारतीय मोवाईल और इन्टरनेट उपभोक्ताओं को उनके उपयोग पर अधिक मूल्य देने की आवश्यकता बनती । इसी तरह चूंकि कोयला और विद्युत किसी भी उत्पाद की उपभोगित उर्जा है और इसी कारण इसका मुगतान कीमतों में जुड़ता है, तो मंहगा कोल भी पावर सेक्टर के व्यापारिक वृत ही नहीं आम उपभोक्ताओं को भी मंहगी बिजली लेने को बाध्य करता है ? इस तरह तो आम जनता के सामने मंहगाई का विरोध कर रहीं भाजपा, लोकसभा में इन मुद्दों पर मंहगी नीलामी का पक्ष लेते हुये मंहगाई का सीधा समर्थन करते दिख रही है पर भाजपा का ये डबल फेस स्टेन्डराइजेशन , कांग्रेस संगठन चुनाव के दौरान कैसे जनता के सामने लाने से चूक गया इस पर जरूर आश्चर्य किया जा सकता है ।
इस तरह तो यही कहा जा सकता है कि संसद में महगाई के पक्ष में अदृष्य राय रखने वाली परंतु जनता के सामने हितेषी बन बढ़ती मंहगाई पर बड़ी बुद्धिमानी से पेश आती भाजपा सरकार अपनी संगठनात्मक कार्यप्रणाली सेे जनता के सामने अपनी इस डबल फेस स्टर्जी को न सिर्फ हमेशा छिपाने में कामयाब रही है बल्कि पेट्रोल डीजल और रसोई गैस की मूल्य वृद्धि जैसे संवेदन शील मुद्दो को नियंत्रित कर देश की वास्तविक अर्थ व्यवस्था को बिगाड़ते इन समीकरणों को छिपाने में भी कामयाव रही .।…..
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